Dinesh Divakar

जी मेरा नाम है दिवाकर, दिनेश दिवाकर नाम तो सुना नहीं होगा इसलिए तो बता रहा हूं खैर मैं रहस्य हूं या कोई पहेली ये तो मैं नहीं जानता लेकिन इतना पता है कि मैं आपके सेहत के लिए बहुत हानिकारक हूं यकिन ना आए तो मेरी कहानियों को ही पढ़कर देख लिजिए। खैर आपको मैं मेरे बारे में क्या बताऊं अगर बताना शुरू किया तो पुरी कहानी बन जाएगी लेकिन आप यहां तक पढ़ ही चुके हैं तो थोड़ा बहुत बता ही देता हूं मेरा जन्म 5 अप्रैल 2000 में हुआ था मैं छत्तीसगढ़ राज्य के एक छोटे से गांव के एक बड़े से बंगलें में रहता हूं मेरा मतलब एक घर से था। खेलकूद के बाद पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देना चाहा तो सारे दोस्तों ने पढ़ने नहीं दिया लेकिन पढ़ाई तो करना ही था नहीं तो पापा की न‌ई चप्पल का नंबर मेरे गालों पर छपना पक्का था खैर 12 वी BIO से फर्स्ट रैंक आया तो दिल बल्ले बल्ले करने लगा उसके बाद वो किया जो हर क्षात्र को करना पड़ता है वो गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिश नहीं है समझें मैंने BSC करने की सोची और कालेज की ओर बढ़ गया फर्स्ट ईयर के साथ साथ कम्प्यूटर में डिप्लोमा भी करने लगा। कालेज का पहला साल अच्छा रहा और कम्प्यूटर में डिप्लोमा कर रहा था उसमें भी टाप किया और सबसे ज्यादा नंबर लाए साथ ही अब फाइनल ईयर में भी अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण हो गया हूं। इसके बाद पैरामेडिकल कोर्स कर रहा हूं साथ ही कम्प्यूटर में डिग्री का कोर्स भी कर रहा हूं देखते हैं क्या होता है जिंदगी में आगे... खैर ये दोनों कोर्स भी अच्छे से निकल जाए यही भगवान से प्रार्थना है। खैर छोड़िए उन बातों को दरअसल पढ़ने का मैं बहुत शौकीन हूं पढ़ने से मेरा मतलब सिर्फ किस्से कहानियों से था 😁 जब भी घर में कोई न‌ई बुक, कामिक्स आती है सबसे पहले उस पर मेरा अधिकार होता फिर चाहे वो कितनी ही बड़ी बुक क्यों ना हो एक दिन में पढ़ ही लेता हूं। वहीं से मुझे भी लिखने का विचार आया और मैंने अपनी कलम उठाई। अरे हां मैं आपको एक बात बताना तो भुल ही गया मैं एक पेंटर भी हूं मैं आपकी एक से बढ़कर एक चुड़ैल और भुत वाली पेंटिंग बना सकता हूं 🤭 इच्छुक व्यक्ति सम्पर्क करें - कब्रिस्तान के सामने गली नंबर 3 भुतिया हवेली के पीछे मुकैंबो हवेली। खैर अब मुख्य बात पर आते हैं प्रतिलिपि एप्प से मेरी मुलाकात फेसबुक के द्वारा हुई जिनकी वजह से आज मैं एक लेखक बन पाया हूं.. प्रतिलिपि पर मैंने बहुत सारी कहानियां पढ़ी हैं जिसमें अंकित महर्षी जी की एक हारर कहानी 'वो लड़की' का और विकास भान्ती जी की हारर कहानी 'खटक' का मैं दिवाना हूं इसी वजह से मैंने इन्हें अपना गुरु माना और लिखने की शुरुआत किया। वो समय जब मैंने पहली कहानी थी वो 18 दिसंबर सन् 2018 था। छोटी छोटी कहानियों के बाद मैंने एक बड़ी कहानी लिखी 'दिव्य दृष्टि- एक रहस्य' इस कहानी पर बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला और अब तक मिल रहा है मैं एक साल तक लगातार लिखता रहा उसके बाद कालेज की परीक्षाओं के कारण मुझे कहानी लिखना बंद करना पड़ा साथ ही अब पढ़ाई-लिखाई के कारण पहले जैसा नहीं लिख पा रहा हूं लेकिन जल्द ही मैं कम बैक करूंगा 😊 मेरी उत्तम रचनाएं 'वासना की भुखी चुड़ैल', दिवाकर एक प्रतिशोध, दिव्य दृष्टि एक रहस्य, द फाइनल डेस्टिनेशन है आप एक बार जरूर पढ़ें। मैंने कुछ बड़ी कहानी लिखने का सोचा है जो बुक प्रकाशन के लिए जाएगी फिर आप उसे आनलाइन मंगाकर पढ़ सकते हैं। PRATILIPI FM, KUKU FM और POCKET FM पर मेरी कुछ कहानियां आडियो में भी उपलब्ध है। जल्द ही मैं भी आडियो कहानी बनाने की कोशिश करूंगा। साथ ही मेरी कहानियां स्टोरीमिरर, शब्द इन आदि प्लेटफार्म पर भी अवेलेबल हैं आपको समय मिलें या न मिले एक बार जरूर विजिट करें। अगर कोई भी समस्या या कोई सवाल है या कोई सुझाव हो तो बेझिझक प्रतिलिपि के मैसेज बॉक्स पर मुझसे संपर्क करे। आप मुझसे सोशल मीडिया पर भी संपर्क कर सकते हैं। एक बार जरूर विजिट करें और मौका पाएं मेरे साथ डिनर करने का वो भी आपके घर पर 🤭😉

Bunyy
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