एक आख़िरी ख़त शाम के पाँच बज रहे थे। बारिश की हल्की फुहारें खिड़की के शीशे पर टपक रही थीं, और सिया अपने पुराने बक्से में कुछ ढूंढ रही थी। पुरानी यादों से भरे उस बक्से में कुछ सूखे गुलाब थे, कुछ फोटोज़, और एक पुराना ख़त। ख़त पर लिखा था “सिर्फ तेरे लिए, जाने से पहले…” सिया के हाथ काँप गए। यह वही ख़त था जो आर्यन ने उसे पाँच साल पहले दिया था, जब वो आख़िरी बार मिला था। पाँच साल पहले… कॉलेज का आख़िरी दिन था। सभी दोस्त हँस रहे थे, सेल्फ़ी ले रहे थे। पर सिया और आर्यन के बीच सन्नाटा था। आर्यन ने धीरे से कहा “सिया, मैं विदेश जा रहा हूँ, मुझे स्कॉलरशिप मिली है।” सिया ने जबरन मुस्कुराकर कहा “अच्छी बात है… जाओ।” पर भीतर कुछ टूट गया। उसे पता था, ये “जाना” सिर्फ़ पढ़ाई का नहीं, दूरी का नाम होगा। आर्यन ने उसे एक छोटा लिफ़ाफ़ा दिया “जब बहुत अकेली लगो, तब खोलना।” सिया ने उसे कभी नहीं खोला। क्योंकि वो हमेशा मानती रही कि आर्यन लौटेगा। वर्तमान में… अब पाँच साल बीत चुके थे। आर्यन की कोई ख़बर नहीं थी। किसी ने कहा, उसने वहीं शादी कर ली… किसी ने कहा, वो अब नहीं रहा। आज, इतने वर्षों बाद, सिया ने वो ख़त खोला। ख़त के अंदर सिर्फ़ तीन पंक्तियाँ थीं “अगर कभी मैं लौट न पाऊँ, तो आसमान की ओर देखना वहाँ एक तारा चमकेगा, और वो मैं होउंगा।” सिया की आँखों से आँसू बह निकले। उसने खिड़की खोली बारिश रुक चुकी थी, और बादलों के बीच से एक तारा झिलमिला रहा था। कुछ देर बाद... उस रात, सिया ने पहली बार चैन की नींद सोई। क्योंकि उसे एहसास हुआ प्यार शरीर से नहीं, आत्मा से जुड़ता है। वो कहीं गया नहीं था… बस एक रोशनी बन गया था, जो हमेशा उसके साथ रहेगी। कभी-कभी प्यार अपने पास नहीं आता, पर फिर भी कहीं न कहीं हमेशा हमारे आसमान में चमकता रहता है
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