बदसूरत

बारिश की बूंदें धीरे-धीरे उसके चेहरे पर गिर रही थीं, पर आरव को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। वो स्कूल के गेट के बाहर खड़ा था, वही पुरानी टोपी पहने, वही झुकी नज़रों के साथ। बच्चे उसे देखते ही हँसने लगते “देखो… वो बदसूरत लड़का आ गया!” वो चुपचाप सिर झुका लेता। हर दिन वही शब्द, वही ताने… और वही दर्द। आरव के चेहरे पर जन्म से एक बड़ा दाग़ था गाल से गर्दन तक फैला हुआ। कभी किसी हादसे में नहीं, बस किस्मत के एक खेल में मिला हुआ निशान। पर असली ज़ख्म वो नहीं था। असली ज़ख्म तो वो था जो हर दिन लोगों की नज़रों से पड़ता था वो नज़र जो कहती थी, “तू अच्छा नहीं दिखता, इसलिए तू अच्छा नहीं है।” एक दिन माँ ने कहा “आरव, आईने में खुद को देखो।” वो बोला “माँ, मुझे आईना नहीं देखना, मैं डर जाता हूँ।” माँ मुस्कुराई “तो उस डर को देखो, अपने चेहरे को नहीं।” आरव ने काँपते हाथों से आईना उठाया। आईने में वही चेहरा, वही निशान… लेकिन इस बार माँ की आँखों में प्यार था, जो उसे आईने से ज़्यादा साफ़ दिखा। माँ बोली “बेटा, जो चेहरा दुनिया देखती है, वो तो सिर्फ एक नकाब है। सच्चाई तो वो है जो दिल में होती है। और तू सबसे सुंदर है क्योंकि तू किसी की हँसी उड़ाता नहीं।” अगले दिन स्कूल में एक ड्रॉइंग कॉम्पिटिशन था विषय था “सौंदर्य” यानी Beauty। सब बच्चों ने फूल, तितलियाँ, सूरज, चेहरे बनाए। आरव ने बनाया एक टूटा हुआ आईना। टीचर ने पूछा “आरव, ये क्या है?” वो बोला “मैम, ये आईना है… जिसमें हर कोई अपना चेहरा देखता है, पर असली सुंदरता तो वो है जो इस आईने के पीछे होती है।” सन्नाटा छा गया। सारे बच्चे, जो रोज़ उसे चिढ़ाते थे, अब उसे देख रहे थे पहली बार बिना हँसे। सालों बाद, वही आरव एक पेंटर बन गया। उसकी पेंटिंग्स में चेहरे नहीं होते थे, सिर्फ आँखें क्योंकि वो कहता था “चेहरे झूठ बोलते हैं, आँखें नहीं।” एक इंटरव्यू में उससे पूछा गया “आपकी पेंटिंग्स इतनी भावनात्मक क्यों होती हैं?” वो मुस्कुराया “क्योंकि मैंने कभी सुंदरता को देखा नहीं… महसूस किया है।” कभी-कभी दुनिया हमें आईने से नहीं, अपने शब्दों से बदसूरत बना देती है। पर जो इंसान उस दर्द से सुंदरता बना ले वो ही असली खूबसूरत होता है। और आरव आज भी हर पेंटिंग के कोने में एक शब्द लिखता है “बदसूरत लेकिन सच्चा।”

1 Views
Time : 2 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: Bunyy
img

All Chapters