स्वैच्छिक

न कोई लालच, न कोई चाह, बस मन में जगती हो एक राह, समाज के हित में कुछ करना, यही है जीवन का असली गहना। जब कोई स्वेच्छा से हाथ बढ़ाए, तो अंधेरों में भी दीप जल जाए, न धन की भूख, न यश की आस, बस सेवा से ही मिले विश्वास। बुज़ुर्गों की आँखों में चमक लाना, बच्चों के होठों पर हँसी सजाना, यही तो है सबसे बड़ा दान, जो करता है जीवन महान। स्वैच्छिक सेवा है पुण्य की ज्योति, जिससे जग में फैले प्रेम की रौशनी, चलो हम सब मिलकर व्रत करें, निस्वार्थ भाव से सेवा करें।

0 Views
Time : 1

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : Bunyy
img

All Chapters