चलो मिलकर व्रत हम लें, स्वच्छता का संकल्प करें, गाँव–गली और शहर हमारा, हर कोना निर्मल, उज्ज्वल करें। कचरा अब इधर–उधर न फेंकें, धरती माँ को गंदा न करें, डिब्बे में ही सब डालें हम, नदी-तालाब को दूषित न करें। साफ़ सड़कें, चमकते आँगन, हवा भी होगी तब सुगंधित, रोग न पनपें, खुशहाली फैले, हर घर होगा तब आनंदित। बच्चों को दे आदत ऐसी, बड़े भी उनका साथ निभाएँ, स्वच्छ भारत का सपना मिलकर, हम सब मिलकर साकार बनाएँ। आओ हाथों में हाथ मिलाएँ, गंदगी से रिश्ता तोड़ें, स्वच्छता का दीप जलाकर, नए युग की सुबह संजोएँ
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