Garima

मैं मुश्किलों के शहर से, मुसीबत को बुलावा देती हूं.. हूं ख्वाहिशों की वो कैदी, जिसे हकीकत सजा देती है.. चिन्ता मुझे शिक्षा की .. अंधकारमय भारत से डरती हूं.. लोभी, छली, व्यभिचारियों का चरित्र उजागर करती हूं.. सशक्त भारत की वो युवा अधिकारों की मांग जो करती है.. दोस्ती भी नहीं मेरी किसी से, मैं हुक्मरानों से दुश्मनी रखती हूं.. तुम सोचोगे मैं अबला हूं... पर गरीबों की मैं सबला हूं.. प्रेम की बात पूछोगे तो ४ से प्रेम मैं करती हूं.. पहला मेरी मां, दूसरा मातृ भूमि, तीसरा परिवार और चौथे पर लक्ष्य को रखती हूं... हृदय के चारों अलिंदो को , भर कर पूरा रखती हूं.. मैं मुश्किलों की शहर से मुसीबतों को बुलावा देती हूं।।

Dignity Tripathi
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