पल रहे थे भीख के टुकड़ों पर जो कल तक यहां, आज क़िस्मत से उन्हें सोने की थाली मिल गई, खूबसूरत सदन का माहौल गंदा हो गया जबसे कौवे को वहां कोतवाली मिल गई।।
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