क्या चाहती हो ?

प्यार जब एक तरफा हो, और मुक्कमल ना हो तो कुछ लोग संगीत सुनते हैं, कुछ लोग राहें बदल कर दूसरों को चुनते हैं, अल्फ़ाज़ जो कभी हो ना सके बयां तो कुछ दोस्त ये समझते हैं की मेरे दोस्त के अन्दर कुछ तो है जो वो बोल नहीं पा रही, होंठो पर है मुस्कान पर कुछ तो है जो छिपा रही ऐसे में कुछ लोग अपने दोस्तों को सुनाते हैं कि वो कितना प्यार करते हैं??? और कुछ लोग हमारे और आपके तरह कवि बन जाते है.... लिखते हैं जज़्बात कलम से अपने... और ग़लती से सामने वाले तक कविता पहुंच गई उसे एहसास हुआ ये प्यार और कविताओं को सारी करके वो दरकिनार कभी जो पूछे वो आपसे... क्यों लिखती हो कविताएं इतनी, और लिखती हो तो लिखती हो इनमें ज़िक्र हमारा क्यों लगता है... कविता तो तुम्हारी पर फ़िक्र हमारा क्यों लगता है??? तो एक ज़वाब जो मैंने बनाया है... अंदाज– ए –बयां हो अगर तो उनसे बोलना उस वक्त... कोई पूछे अगर आपसे की बोलो क्या चाहती हो???? Note: इस कविता का उद्देश्य केवल मनोरंजन है, इन कविताओं का हमारे व्यक्तिगत जीवन से कोई संबंध नहीं है... इनकी रचना एक संयोग मात्र है, जिसे मैंने अपनी एक पाठिका की माँग पर रचाया है।।

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: Dignity Tripathi
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