"एकतरफ यह कविता एकतरफ़ा प्रेम की गहराई और संवेदनाओं को उजागर करती है। नायिका अपने मन की पीड़ा, उम्मीद और चुपचाप बहते प्रेम को शब्दों में ढालती है। वह जानती है कि उसका प्यार कभी पूरा नहीं हुआ, फिर भी उसे विश्वास है कि कभी न कभी, किसी मोड़ पर, किसी ख़ामोशी में,वो भी उसे याद करेगा। बीते लम्हों की गूंज, दोस्तों में उसके नाम का ज़िक्र, और अधूरे जज़्बातों की परछाइयाँ इन सबमें वो अपने प्रेम की मौजूदगी महसूस करती है। कविता एक मौन प्रतीक्षा है, एक आशा की लौ है, जो बुझी नहीं… बस टिमटिमा रही है।
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