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Kamna Sariyal ( Kamna )
“दिल से निकले जज़्बात जब शब्दों में ढलते हैं, तो वो सिर्फ लिखावट नहीं, एक एहसास बन जाते हैं। मैं वही लिखती हूँ जो महसूस करती हूँ—कभी प्यार, कभी दर्द, तो कभी ज़िंदगी की सच्चाइयाँ। मेरी कोशिश रहती है कि मेरे शब्द किसी के चेहरे पर मुस्कान या आँखों में हल्की सी नमी जरूर छोड़ जाएँ।”

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