अनोखा एहसास

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अनोखा एहसास


तुमसे शिकायत हैं की मुझे तुमसे शिकायत क्यों नहीं? तुमसे मोहब्बत है मगर शिकायत हैं की मुझे तुमसे इश्क़ क्यों नहीं? नहीं हैं चाहत की जिंदगी भर की कसमें और रश्मे हो मुझे तुमसे, फ़िर भी ख्याल हैं की तुम्हारी एक नजर की तलब क्यों आज भी पुरी नहीं?

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