ज़िंदगी में बहुत सी बातें हमें समझ नहीं आतीं, क्यों हुईं, और हमारे सवाल होते हैं: "मेरे साथ ही क्यों?", "मैं ही क्यों?", "मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?", "मैंने तो किसी के साथ कभी कुछ गलत नहीं किया।" ऐसे ही बहुत सी बातें हैं, और शायद इसी लिए ज़िंदगी को पहेली बोलते हैं। ऐसी पहेली जिसे सुलझाना थोड़ा मुश्किल है।
तो ऐसी ही है मेरी कहानी, एक ऐसे किरदार की कहानी जिसने प्यार किया और हार दिया। ज़िंदगी ने ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया कि वह वर्तमान और भूतकाल के बीच उलझ चुकी है। कैसे उसे प्यार हुआ, कैसे उसकी ज़िंदगी बदली, कैसे उसके दोस्त बने, और कैसे सबने उसका साथ दिया। क्या प्यार में मंजिल मिलना ज़रूरी होता है, ये भी पता चलेगा। हम देखेंगे प्यार के कुछ अलग मायने और रूप। ज़िंदगी क्या-क्या और कैसे-कैसे सिखाती है। लेकिन उससे पहले...