आधा चम्मच प्रेम

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आधा चम्मच प्रेम


यह आधा चम्मच प्रेम है, जो तुमने दी है मुझे, ना ज्यादा, ना ही कम, बस नाप-तोल के हद में। न रोमांच का तूफान इसमें, ना कोई मीठी सी मिठास, बस जैसे चाय में कम हो चीनी, और स्वाद में हो हल्की खलिश। तुम्हारे इशारों में भी नफ़ासत, जैसे हिसाब लगा रहे हो दिल का, आधा चम्मच जो बचा लिया, शायद अगले दिन के लिए! पर क्या करूँ मैं भी नादान, ये आधा चम्मच भी कर गया काम, क्योंकि दिल ने चुपचाप मान लिया, कम भी सही, पर प्रेम तो है तमाम। तो यूं ही देते रहो आधा-आधा, मैं इसे पूरा समझकर पी जाऊंगा, क्योंकि प्रेम की ये छोटी सी खुराक, मेरे दिल को भी भा जाएगी।
लेखक : Raahi

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