आत्मबोध
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आत्मबोध
कविता
खुद से मिले तो रास्ते दिखने लगे, दिल के जख्म भी अब सिलने लगे। आत्मबोध का जादू है ऐसा, कि अंधेरों में भी दीये जलने लगे।
लेखक : Mini
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