𝔸𝔻ℍ𝕌ℝ𝕀 𝕊ℍ𝔸𝔻𝕀 : 𝘐𝘚𝘏𝘘 𝘈𝘜𝘙 𝘐𝘕%9

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                 कभी कभी, मोहब्बत का सफर नफरत की गलियों में मुड़ जाता है, और जहां एक शादी का सपना होता है, वहां दर्द की हकीकत बन जाती है।                            सिंदूर की खुशबू और ढोल की धुनों से महकता माहौल, लेकिन हर किसी के चेहरे की खुशी के बीच, सिर्फ एक जोड़ी आँखों में दर्द था। "रुद्र," स्नेहा ने धीमी आवाज़ में कहा, लेकिन उसकी आवाज़ उस भीड़ में खो गई।                 रुद्र की आँखों में आँसू थे, लेकिन उन आँसुओं के पीछे सिर्फ गुस्सा था। वो अपनी जगह खड़ा, बस स्नेहा को देख रहा था। उसके लहंगे के रंग जितने चटक थे, उसकी आँखों में उतनी ही उदासी थी।                   रुद्र ने धीमे से कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में एक अजीब सिहरन थी, "तुमने जो मेरे साथ किया, स्नेहा, उसके बाद मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूँगा।"                                 स्नेहा का दिल जैसे किसी ने मुट्ठी में कस लिया हो। वो चाहकर भी कुछ बोल नहीं पा रही थी। उसकी उंगलियाँ अपनी चूड़ियों को पकड़ते हुए काँप रही थीं।                       रुद्र ने अपनी आवाज़ ऊँची करते हुए कहा, “आज तक मैंने तुमसे प्यार में पागलपन किया, लेकिन अब तुम्हें मेरी नफरत का सामना करना होगा।"                 ये सुनकर स्नेहा के चेहरे पर एक भी शब्द नहीं आया। उसकी आँखों से बहते आँसू उसकी सच्चाई कह रहे थे, लेकिन शायद रुद्र के गुस्से के आगे उनका कोई मोल नहीं था। “क्यों किया तुमने ये?” रुद्र चीखा, लेकिन उसकी आवाज़ दर्द से भरी थी।                      स्नेहा ने पहली बार नज़र उठाई और कहा, "रुद्र... जो तुम सोच रहे हो, वो सच नहीं है। मैंने जो भी किया, उसके पीछे एक वजह थी। लेकिन तुम्हें समझाने का मौका शायद किस्मत ने मुझे दिया ही नहीं।"             रुद्र ने एक गहरी सांस ली और कहा, "चुप रहो, स्नेहा। मुझे तुम्हारी कोई सफाई नहीं चाहिए। मोहब्बत करते-करते मैंने खुद को खो दिया। अब मैं तुम्हें भी खो दूंगा।"            अपनी बात खत्म कर के रुद्र अपने सिर पे बांधे सेहरे को स्नेहा के पैरों के पास फेक कर कहता है " दोबारा मुझे ये शकल नहीं देखनी। भूलना चाहता हु अब उस चेहरे को जिस के बिना कभी मुझे नींद भी नहीं आया करती थी। आज इसे पूरी ज़िन्दगी ना देखने की कसम खाता हु मैं!! " कह कर वो स्नेहा को पूरी तरफ से अवॉइड कर के वहां से चला जाता है।         पीछे रहती है तो सिर्फ उसकी बाते, उसका कहा हर लफ्ज़ जो अब भी उस पूरे मंडप में खड़ी उस रोती हुई दुल्हन के कानो में गूंज रही थी। और उसपे टिकी थी वहां खड़े हर शख्स की निगाहे जिनमें से किसी के आँखो में उसके लिए घिन और गुस्सा था तो किसी की आँखों में हमदर्दी!!              स्नेहा की आँखों में एक अलग ही दर्द उभर आया। वह जानती थी कि उसने जो किया, वो रुद्र के लिए सही नहीं था, लेकिन उसके दिल में जो सच था, उसे कोई नहीं समझ सका।                                 अक्सर जिनसे हम सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, वही हमें सबसे ज्यादा दर्द देते हैं। स्नेहा और रुद्र की कहानी हमें यह सिखाती है कि प्यार सिर्फ महसूस करने का नाम नहीं है, बल्कि समझने का भी है। लेकिन हर कहानी की एक हैप्पी एंडिंग नहीं होती।                  कभी-कभी, प्यार से ज्यादा नफरत की गहराई दिखती है। और शायद, वही प्यार का सबसे बड़ा इम्तिहान है।
: Sansi

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