आत्मबोध
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आत्मबोध
कविता
हर उलझन, हर दर्द, हर भय, मेरे भीतर ही एक सूरत बनाता है, जो पहचानता है अपने अंदर, वही जीवन का सच्चा अर्थ पाता है।
: Writer Dev
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