मूकदर्शक
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मूकदर्शक
कविता
मौन रहकर भी जो हर दर्द सह लेता है, सच-झूठ के हर खेल को गले लगा लेता है। वो मूकदर्शक है, जो चुपचाप खड़ा रहता है, हर छलावे के बीच भी सत्य को पढ़ लेता है।
लेखक : Mini
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