निहारिका

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निहारिका


मौसम बरसात का था। रह रहकर जोरों की बारिश हो रही थी। वो मेरे सामने की खिड़की में खड़ी थी लेकिन अचानक से वो गायब हो गई। मैंने जाकर देखा तो वो वहां नहीं थी। जो रूह प्यासी है जिसमें उदासी है वो है घूमती लेकिन क्या हो जब इसी रूह से आपकी मुलाकात हो.. वो उस हवेली में अकेली बची थी। वो अपने कमरे में बंद थी तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया....
: Jaun

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