मुकदर्शक
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मुकदर्शक
कविता
सोच के बंधन तोड़, उन्मुक्त उड़ान भर, आत्मबल से जीवन का हर सपना साकार कर। जागृत मन, जागृत हृदय, यही जीवन का सार, सच को पहचान, अंधकार का कर संहार।
: rani
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