भाग्य का खेल

client-img

भाग्य का खेल


पहली कविता भाग्य की दोहरी प्रकृति को समझाती है। जब भाग्य अच्छा होता है, तो दुनिया साथ देती है, और बुरा हो तो सब साथ छोड़ देते हैं। भाग्य को बागेश्वर द्वारा लिखा गया माना गया है, लेकिन इसे कर्म से बदला जा सकता है। यह प्रेरणा देती है कि इंसान को भाग्य पर भरोसा रखते हुए अपने कर्म पर अधिक ध्यान देना चाहिए। दूसरी कविता में भाग्य खुद को एक साथी और आईने के रूप में प्रस्तुत करता है। भाग्य कहता है कि वह केवल इंसान के कर्मों का परिणाम है। इंसान उसे दोष देकर या उसे सब कुछ मानकर नहीं चल सकता। यह कविता सिखाती है कि भाग्य को बदलने का अधिकार इंसान के हाथ में है, और कर्म ही उसकी दिशा तय करते हैं।
: Simple Human

14

Views

5

Ratings

2 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप