भाग्य
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भाग्य
कविता
भाग्य की परछाई हमेशा साथ रही, कभी उसने हमें उठाया, कभी गिराया भी। वो एक रहस्यमयी धारा सी बहती रही, कभी पास आई, कभी दूर जा छिपी।
: rani
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