पत्थर दिल

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पत्थर दिल


यह कविता दुनिया की संवेदनहीनता को उजागर करती है, जहाँ इंसानियत खो चुकी है। भूख से बिलखते बच्चों और दर्द में तड़पते इंसानों की चीखें अनसुनी रह जाती हैं। दया और करुणा केवल किताबों में सिमटकर रह गई हैं, और जिंदगी सड़क किनारे दम तोड़ रही है।

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