पत्थर दिल
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पत्थर दिल
कविता
आँसू भी अब मानो रूठ गए, गम के बादल कहीं दूर छूट गए। जो दिल धड़कता था जज़्बातों से, आज बस धड़कता है मजबूरियों से।
लेखक : Writer Dev
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