आख़िर क्यों????
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आख़िर क्यों????
कविता
कविता
तेरे साथ हर पल जैसे एक सपना था, तेरे बिना हर लम्हा अब अपना सा नहीं लगता। दिल पूछता है बार-बार यही सवाल, आखिर क्यों मोहब्बत ने मुझे सजा दी ऐसी?
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