आखिर क्यों

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आखिर क्यों


"आखिर क्यों" यह कविता इंसान के मन में उठते गहरे सवालों की अभिव्यक्ति है। इसमें जीवन की उलझनों, रिश्तों की दूरियों, और इंसानियत के क्षय पर सवाल उठाए गए हैं। हर पंक्ति एक नई सोच को जन्म देती है, जो पाठकों को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर देती है। यह कविता भावनाओं की गहराई और वास्तविकता की कठोरता का संगम है, जो दिल को छू जाती है।

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