दिल्लगी ( A bl story) भाग 1
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रोहन. . . . . . कभी तो समय पर उठ जाया कर बेटा
रोहन को जगाते हुए उसकी माँ ने उसके कमरे की खिडकियों से पर्दे हटा दिए
सोने दो ना प्लीज माँ . . .. कहते हुए रोहन ने चादर दोबारा ओढ़ ली
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उठ जा कुंभकर्ण आज तेरे कॉलेज का पहला दिन है और पहले दिन ही.. . . . आधे शब्द मुँह में रह गए क्योंकि रोहन उठकर सीधा बाथरूम की तरफ जा चुका था
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स्वाति जी (रोहन की माँ) रूम से निकलकर किचिन में आ चुकीं थी क्योंकि उनके लाडले के लिए उनको नास्ता जो तैयार करना था !
रोहन जल्दी जल्दी नाश्ता ख़तम करके कॉलेज के लिए निकलता है
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रोहन कॉलेज पहुचा जल्दी से आटो को पैसे देकर लगभग भागते हुए कॉलेज में दाखिल हुआ
क्योंकि उसके सारे दोस्त वहां पहले से ही पहुच चुके थे और उसको फोन पर फोन किए जा रहे थे
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रोहन तेजी से आगे बढ़ता जा रहा था और चारो अपने दोस्तों को भी ढूंढ रहा था
जल्दबाजी चलते हुए अचानक वह किसी से टकरा जाता है
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इससे बेख़बर की वह किस्से टकराया है sorry बोलता है और आगे बढ़ जाता
जैसे ही ग्राउंड में पहुंचता है उसके दोस्त खड़े खड़े उसका वही इंतजार कर रहे
उनके पास आता
सॉरी यार आज लेट हो गया
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पहले दिन ही जनाब को लेट हो गई आगे क्या करेगे . . . . . विवेक ने शोभित से आँख मारते हुए कहा
देर हो गई तो हो अब तुम लोग मेरी टाँग मत खींच . . . कहते हुए रोहन मुह फूला कर दूसरी साइड कर लेता है
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ओये मुँह मत फूला अब ल़डकियों जैसे . . . . . .
शोभित कहता है
अब यही खड़े रहोगे या अंदर चलकर कॉलेज भी देखना है कहते हुए सब वहां से चले जाते हैं
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कोई अभी भी वहीं खड़ा था जहां रोहन किसी से टकरा गया था वह उसी ओर देख रहा जिस ओर रोहन गया था
बल्कि पूरे टाइम वह रोहन को ही देख रहा था
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शशांक सहगल एक आमिर बाप का बेटा पर रहता बिल्कुल आम लोगों की तरह है वह पूरे सहगल इंडस्ट्री का इकलौता वारिस है
जिसको अपनी दौलत से ज्यादा अपनी आजादी प्यारी है
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शाम को कॉलेज ऑफ होने के बाद सभी अपने अपने घर जाते है रोहन भी घर जाता है अपने पहले दिन को याद करते हुए बहुत खुश
होता है क्योंकि उसका पहला दिन था आज जो कि उसने बहुत इंजॉय किया
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रोहन रात को बिस्तर पर लेता अचानक से उसको याद आया कि सुबह वह किसी से टकरा गया था
और ऐसा पहली बार हुआ कि अपनी ही गलती पर वह ढंग से माफी भी नहीं मांग पाया
.क्या सोचता होगा वो लड़का की कितना बदतमीज लकड़ा है गलती की गलती की ऊपर से माफी भी नहीं मागी
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चल कोई ना रोहन तू टेंशन मत ले माफी ही तो माँगनी है कल मांग लेना अरे माफी तो तू तब मांगेगा जब उसे पहचान पाएगा चल कोई ना कल का कल देखेंगे. . . . . ... . . अपने आप से कहते हुए वह सो चुका था
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इधर शशांक की आँखों से नींद बिल्कुल गायब थी
ना जाने क्यों वो लड़का मुझे अपना सा लग रहा था ना जाने कौन सा अहसास जग उठा
लेकिन जो भी था बड़ा प्यारा. .. . . यही सब सोचते हुए नींद ने शशांक को कब अपने आगोश में ले लिया उसे पता ही नहीं और वो सो गया उसकी सीधे अगली सुबह ही खुलती है !
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