डॉ. विक्रम ने अपने जीवन के सबसे बड़े अविष्कार पर काम करना शुरू किया था – एक ऐसा रोबोट जो इंसानों की तरह सोच सके, समझ सके और काम कर सके। वह जानता था कि यह काम बहुत कठिन है, लेकिन उसने ठान लिया था कि वह इसे जरूर पूरा करेगा। दिन-रात एक करके उसने अपने प्रयोग को पूरा किया। आखिरकार, वह दिन आ ही गया जब डॉ. विक्रम ने अपना रोबोट तैयार किया।