आशाएँ
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आशाएँ
कविता
सपनों का पीछा करती हैं, जैसे तितली का रंगीन झूला, जो कभी साकार हो जाएं, कभी चुराकर ले जाएं कोई भूला। कभी गहरी होती हैं ये, जैसे रात का सन्नाटा, कभी चमकती हैं जैसे चाँदनी, कभी लगती हैं महकता
: rani
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