दिव्या उम्र 25 साल, एक सिंपल और प्यारी स्कूल टीचर है। उसकी खूबसूरती उसकी सादगी में है।
घर में माता पिता के साथ दो छोटे भाई है। दिव्या की शादी अभी तक नही हुई है।
इसके लिए रिश्ते आते और चले जाते कभी ना दिव्या की तरफ से होती तो कभी लड़के वालों की तरफ से।
पंडित जी ने न जाने कितने ही दोष उसकी कुंडली में गिरा दिए थे। दिव्या पंडित जी के बताएं हर उपाय को करती और करते-करते इतना थक गई क्या अब उसने यह सारे काम करना छोड़ ही दिया।
दिव्या बस अब अपने भाग्य के भरोसे जी रही थी।
दिव्या सबके साथ बहुत खुश थी।, किसी ने उसे कभी दुखी नहीं देखा था।
दिनभर की भाग दौड़ के बाद दिव्या रात को सबको प्यार से खाना खिलाती है। खुद भी खाती है। काम खत्म कर अपने कमरे में चली जाती है।
कमरे में जाते हैं दिव्या के चेहरे की मुस्कान एकदम से गायब हो जाती है। उसके चेहरे पर उतर आता है। अपार दुख तकलीफ तन्हाई....
दिव्या अपने भारी कदमों से चलाकर अपने बेड पर जाकर उल्टा पेट के बल लेट जाती है। और तकिए में अपना चेहरा छुपा कर रोने लगती है।
दिव्या को रह रहकर सिर्फ एक शख्स की आवाज सुनाई दे रही थी ।
जो उससे कह रहा था,"" दिव्या मेरी शादी तो तुमसे ही होगी, अगर तुमने किसी और से शादी की तो, मैं तुम्हारे ससुराल आकर तुम्हें उठा लाऊंगा।"
उस लड़के की बात सुनकर दिव्या खिल खिलाकर बोली ," तुम कितने पागल हो आदित्य, कुछ भी बोलते हो।, इतना ही प्यार करते हो तो अपने मम्मी पापा से हमारी शादी की बात कर लो।
"बस मेरी जान कॉलेज complete होने दो, फिर तुम मेरे घर मेरी दुल्हन बन कर आओगी।", आदित्य दिव्या के माथे को चूम कर बोला।
आदित्य और दिव्या के प्यार की मिशाल पूरे कॉलेज में दी जाती थी।
कॉलेज विकेशन पर सभी दोस्त, मनाली जाने का प्लान बनाते है। उसमे दिव्या और आदित्य भी थे।
दिव्या ने न जाने कितनी मिन्नते की थी अपनी मां से इस ट्रिप के लिए। आखिर में दिव्य की मां रिया और सोनाली के साथ जाने की वजह से मान जाती है ।
अगले दिन 6 दोस्तो का ग्रुप मनाली के लिए निकल जाता है।
जिसमे दिव्या की बेस्ट फ्रेंड रिया और सोनाली थी। तो वही आदित्य के साथ उसके दोस्त सौरभ और पारस थे।
कुछ घंटों के थका देने वाले सफर के बाद सभी मनाली पहुंच जाते है।
सभी लोग पहले से बुक किए हुए होटल में रुक जाते हैं। खाना खाकर सब रात को घूमने का प्लान बना कर रेस्ट करने अपने रूम में चले जाते हैं।
खूबसूरत वादियों के साथ पढ़ती हुई ठंड में सबको जल्दी ही सबको सुकून की गहरी नींद आ जाती है।
वो लोग पूरे दिन मनाली में रुकने वाले थे।
जैसा सब ने सोचा था सभी रात को मिलकर बाहर मार्केट घूमने जाते हैं।
ठंड होने की वजह से सब ने गर्म कपड़े पहन रखे थे। सभी बाहर बहुत इंजॉय करते हैं। सब साथ में bone fire का मजा लेते है। खूब सारी शॉपिंग भी करते है।
आदित्य बार बार दिव्य को सबके सामने खुद के करीब कर रहा था। ये बोलकर की उसे ठंड बहुत लग रही है। वो बहाने से उसे बहुत प्यार लूटा रहा था।
दिव्या उसे अपना मफलर देती है। उसके लिए कॉफी लाती है। कुल मिला कर आदित्य का पूरा ख्याल रखती है।
रिया और सोनाली दिव्या की केयर देख कर बहुत खुश हो रही थी। तो वही सौरभ और पारस भगवान से दिव्या जैसी लाइफ पार्टनर के लिए प्रार्थना कर रहे थे।
सभी रात के 12 बजे लौटकर होटल वापस आते है। सब अपने रूम में कल सुबह मिलने का बोलकर चले जाते है।
सभी के रूम में जाने के बाद दिव्या अपने रूम में जाने वाली थी।
आदित्य दिव्या का हाथ पकड़ कर बोला, " दिव्या तुम मेरे साथ रुक जाओ मेरे रूम में, मुझे मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है।"
दिव्या ने सोचा आदित्य को सुलाकर वह अपने रूम में वापस चली जाएगी।
"ठीक है चलो मैं तुम्हें सुलकर अपने रूम में चली जाऊंगी।", दिव्या ने कहा।
रूम में आकर आदित्य बाहर do not distrub का बोर्ड रूम अंदर से लॉक कर देता है।
दिव्या को इसके बारे में कोई खबर नहीं थी।
आदित्य अपने कपड़े उतार कर जल्दी से बेड बेड पर चला जाता है ।,और रजाई के अंदर घुसकर कांपने लगता है।
"अरे तुम्हें ठंड लग रही है तो तुमने कपड़े क्यों उतारे तुम कपड़े पहन कर भी तो रजाई के अंदर घुस सकते हो ", दिव्या ने परेशान होकर कहा क्योंकि उसे आदित्य की चिंता हो रही थी ।
दिव्या कुछ करो मुझे बहुत ठंड लग रही है। दिव्या रूम का एसी का टेंपरेचर बढ़ा देती है जिससे दिव्या को घर में लगने लगती है लेकिन आदित्य अभी तक कांप रहा था।
दिव्या अपने सारे गर्म कपड़े उतार कर सोफे पर रख देती है और आदित्य को छूकर देखने लगती है।
"तुम्हारी बॉडी बहुत गर्म है। आदित्य तुम्हें तब भी ठंड लग रही है। कहीं तुम्हें बुखार तो नहीं है।", दिव्या परेशान होकर बोली।
आदित्य एकदम से रजाई को हटाता है। और दिव्या को अपने नजदीक खींच कर उसके ऊपर आ जाता है।
"हां मुझे तुम्हारे प्यार का बुखार चढ़ा है मेरी जान", बोलकर आदित्य दिव्या की होठों पर अपने होंठ रख देता है और दिव्या की मर्जी के बिना उसके साथ मन मानी करने लगता है।
आदित्य अपने प्यार का सबूत दिव्य के साथ इंटीमेट होकर मांगता है।
दिव्या के लाख मना करने पर भी आदित्य दिव्या की नही मानता और उसके साथ इंटीमेट हो जाता है।
अगली सुबह दिव्य की आदित्य के बिना होती है। वह जल्दी से अपने मोबाइल में टाइम देखी है। तो सुबह के 11:00 बज रहे थे।
दिव्या को अपने साथ धोखा होने का शक होता है। दिव्या जल्दी से आदित्य को कॉल मिलती है। दिव्या को लगा था आदित्य उसका कॉल नहीं उठाएगा।
आदित्य की फोन पर रिंगटोन जा रही थी लेकिन आदित्य उसे उठा नहीं रहा था कुछ ही देर में दरवाजा खोलने की आवाज आती है जिसे सुनकर दिव्या डर जाती है और अपने आप को रजाई से कर कर लेती है।
दरवाजा खुलने के साथ आदित्य अपने हाथ में खाने की थी लेकर अंदर आता है।
"जानेमन उठ गई तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ और नाश्ता कर लो। बाहर सब कुछ रहे थे तो मैंने बोल दिया तुम्हे फीवर है।", आदित्य ने कहा।
दिव्या की आंखों में जो डर था वह आदित्य को देखकर गायब हो गया था दिव्या को आदित्य पर यकीन हो गया था कि वह उसे धोखा नहीं देगा अगर उसे धोखा देना होता तो वह उसे छोड़कर कब का जा चुका होता।
दिव्या जल्दी से वॉशरूम जाकर फ्रेश होकर तैयार हो जाती है। और नाश्ता कर अपने रूम में जाती है।
दूसरा दिन भी उन लोगों ने बहुत मस्ती के साथ गुजारा था। बहुत इंजॉय किया था। लेकिन दिव्या सारा दिन खोई खोई सी थी।
दिव्या को खोया हुआ देख रिया बोली," दिव्या क्या हुआ उदास क्यों है। कोई प्रॉब्लम है क्या?"
"हा दिव्या मैं भी देख रही हूं तू खोई खोई सी है। क्या बात है?", सोनाली रिया का साथ देखकर बोली
"कुछ नही बस थोड़ा बुखार है का असर है।", बोलकर दिव्या बात टाल देती है।
दोबारा से सब अपनी मस्ती में लग जाते है।
उन्हें बस आज रात रुक कर सुबह अपने घर के लिए निकलना था।
आज रात वह लोग जल्दी लौट आए थे खाना खाकर सभी अपने रूम में रेस्ट करने चले जाते हैं क्योंकि उन्हें कल सुबह जल्दी निकलना था।
दिव्या अपने रूम में जाकर अपने सामान को पैक करने लगती है। तभी उसके दरवाजे पर कोई नॉक करता है। दिव्या कंफ्यूज होकर दरवाजा ओपन करती है। तो सामने आदित्य खड़ा होकर मुस्कुरा रहा था।
"आदित्य तुम यहां क्या कर रहे हो तुम अपने रूम में क्यों नहीं गए ",दिव्या हैरान होकर बोली।
आदित्य अंदर जाकर जल्दी से दरवाजा बंद कर लेता है और दिव्या के कान के पास आकर बोला ," कल सुबह तो हम घर चले जाएंगे साथ में फिर वक्त बिताने का मौका पता नहीं कब मिलेगा तो हम दोनों फिर से एक बार एक साथ हो जाते हैं।"
दिव्या मना करती है क्योंकि कल रात उसने जो किया था उसके लिए उसे अभी भी गिल्ट महसूस हो रहा था।
"नहीं आदित्य, कल जो हुआ नही होना चाहिए था।, मैने अपना सब कुछ गवा दिया और तुम्हे अपनी गलती पर पछताने के बजाय और करना है।
आदित्य अपने चेहरे पर बेशर्मी लाद कर बोला," कॉलेज खत्म होने के बाद हम लोग वैसे भी शादी कर रहे हैं। तो यह सब करने में गलत ही क्या है। जब एक बार कर ही लिया है तो दोबारा करने में क्या हर्ज है?"
बोलकर आदित्य अपने कदम दिव्या की तरफ बढ़ने लगता है और दिव्या दर से अपने कदम पीछे लेने लगती है।
इस बार भी दिव्या की एक नहीं चलती है। और आदित्य सारी रात अपनी मर्जी दिव्या पर चलता रहा।
अगले दिन सभी अपने घर के लिए निकल गए, और रात के वक्त सब अपने घर तक पहुंच चुके थे।
आदित्य सारे रास्ते दिव्या की बहुत केयर करता रहा। उसकी देख भाल करता रहा। दिव्या आदित्य के इस व्रत से खुश थी। साथ में उसका जो आदित्य को लेकर दर था। खत्म हो गया था।
जल्दी ही वह दिन भी आ गया जिसका इंतजार दिव्या और आदित्य को था। उनके कॉलेज का आज आखिरी दिन था।
दिव्या बड़ी बेसब्री से कॉलेज में आदित्य का इंतजार कर रही थी आज आदित्य अपने घर वालों का फैसला दिव्या को बताने वाला था।
दिव्या भी आज अपने घर पर बताने वाली थी। लेकिन उस से पहले वो आदित्य की तरफ से कंफर्म होना चाहती थी।
आदित्य खुशी खुशी कॉलेज के अंदर एंटर करता है। वो सबको हैलो करता हुआ अपने क्लास रूम की तरफ जा रहा था। रस्ते में उसे दिव्या मिल जाती है। दिव्या को देखकर आदित्य का चेहरा बिल्कुल उतर जाता है। जैसे दिव्या कोई सांप हो और उसे सूंघ लिया हो।"
आदित्य का चेहरा देखकर दिव्या समझ जाती है। माजरा क्या है ?
दिव्या आदित्य का हाथ पकड़ कर बोली," तुम मुझसे शादी करोगी ना तुमने कहा था अगर तुम्हारे घर वाले नहीं मानेंगे तब भी तुम मुझसे शादी करोगे। कहो न आदित्य तुम मुझसे शादी करोगी ना।"
आदित्य एक झटके से दिव्या से अपना हाथ छुड़ाता है। और दिव्या को अपने बैग से एक कार्ड निकाल कर उसके हाथ में रख देता है।
"मेरी शादी फिक्स हो गई है दिव्या मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता और वैसे भी तुम मेरे टाइप की लड़की नहीं हो जिससे मैं शादी करूंगा, मैं शादी अपने माता-पिता की मर्जी से करूंगा तुम्हारे कहने से नहीं", बोलते वक्त आदित्य के चेहरे पर एक बहुत ही कपट भरी मुस्कान थी।
दिव्या अपने हाथ में वह कार्ड लिए शून्य होकर खड़ी रह जाती है। आदित्य ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी थी।
दिव्या को कार्ड लेकर बेहोश हो जमीन पर गिर जाती है। जब उसकी आंख खुली तो उसे पता चला वो प्रेगनेंट है।
रिया और सोनाली हैरान होकर दिव्या को देख रहे थे दिव्या उनके सवाल भरी नजरों को देखकर उन्हें सारी बातें बता देती है।
रिया और सोनाली दिव्या को दिलासा देकर बोली," देख हमारी सलाह तो यही है कि तू उसे बच्चों को गिरा दे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जा क्योंकि आदित्य बहुत बड़े खानदान का बेटा है। तो उसे नहीं टकरा सकती।"
दिव्या का मन अभी भी आदित्य का धोखे को मान ने को तैयार नहीं था।
दिव्या गुस्सा होकर बोली," ये क्या बकवास कर रही हो तुम, ये मेरे और मेरे प्यार की निशानी है। देखना आदित्य को जब पता चलेगा, वो मुझे शादी करेगा। देख लेना तुम।"
"आदित्य की शादी हो चुकी है। दिव्या और कल ही हुई है। ", रिया दिव्या पर गुस्सा करके बोली।
"उसने तुम्हे कार्ड बाद में दिया है। ये देख कार्ड पर डटे कल की थी और आदित्य ने कार्ड तुझे आज दिया है। शादी उसने अपने होम टाउन से की है। इसलिए किसी को भनक नहीं लगी। ", सोनाली ने कहा।
"दिव्या की तो जैसे जान निकल गई थी। उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था।
"नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता, आदित्य ऐसा नहीं कर सकता।", पागलों की तरह रोते हुए दिव्या बोली।
दिव्या के बारे में सोनाली और रिया के अलावा किसी को नहीं पता था। लेकिन आदित्य वार्ड के बाहर खड़े होकर सब सुन रहा था।
आदित्य की आंखों में गुस्सा साफ नजर आ रहा था।
दिव्या जल्दी से अपने बेड से उतर जाती है।
"आदित्य नही तो उसकी मां मेरे बच्चे को जरूर अपनाएगी तुम दोनो देखना, आदित्य पापा बन ने वाला है सुनकर वो बहुत खुश होगा। उसकी मां मुझे बहुत प्यार करती है।", बोलकर दिव्या जल्दी से बाहर निकल जाती है।
आदित्य दिव्या के पीछे उसे रोकने जाता है। दिव्या जैसे ही सीढ़ियों से उतरने वाली थी । आदित्य उसे धक्का मार कर नीचे गिरा देता है।
दिव्या ने गिरते हुए आदित्य का चेहरा देख लिया था उसे इस बात का बहुत गहरा सदमा लगता है कि अधिक तेरे उसे धक्का दिया था। दिव्या बेहोश हो जाती है।
रिया और सोनाली दौड़कर दिव्या के पास अति है। आदित्य उन्हें देख कर छिप जाता है।
अगली सुबह जब दिव्या की आंख खुलती है। तो वो सब कुछ खो चुकी थी। अपना प्यार और अपना बच्चा।
दिया बहुत रोती है।
दिव्या रोते रोते अपनी आंखे खोल देती है। क्योंकि सुबह हो चुकी थी।
दिव्या की छिपी हुई तन्हाई हर रात उसके साथ चली आई थी। और डूब जाती थी। गहरे अंशुओ के समंदर में।
धन्यवाद।
Kahani kaisi lagi comment me batana