अनोखी कल्पनाएँ

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अनोखी कल्पनाएँ


नदियों का संगीत सुनूँ, झरनों की मीठी बातों में। सूरज संग मैं चल पड़ूँ, धरा के हर दिपते तातों में।
: Writer Dev

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