अनछुआ एहसास

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अनछुआ एहसास


यह कविता एक ऐसे एहसास के बारे में है जो अनदेखा और अनछुआ होते हुए भी दिल के बहुत करीब होता है। यह एहसास शब्दों में बंधा नहीं जा सकता, फिर भी इसकी गहराई को महसूस किया जा सकता है। यह पहली बारिश की बूंदों, मधुर हवा या सपनों की तरह है जो मन को छूते हैं लेकिन दिखाई नहीं देते। यह कविता उन भावनाओं को व्यक्त करती है जो बिन कहे भी हमारे दिल में खास जगह बना लेती हैं।
: Simple Human

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