"खत – जो कभी भेजा नहीं गया"
"खत – जो कभी भेजा नहीं गया" कविता उन अनकहे एहसासों की दास्तान है, जो एक अधूरे खत में सिमट गए। यह प्रेम, यादों और बिछड़न के बीच पनपे जज़्बातों को दर्शाती है। शब्दों की खामोशी में छुपे इकरार और हिम्मत की कमी इसे मार्मिक और कालजयी बनाती है।