मोहब्बत कभी किसी क़ैद से बंधकर नहीं रहती, लेकिन कभी-कभी यह ऐसी बंधन बन जाती है, जिससे निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता। यह कहानी उस मोहब्बत की है, जो किसी क़ैद से भी सशक्त थी। यह एक ऐसी मोहब्बत की कहानी है, जिसमें इन्सान खुद को ही क़ैद कर लेता है, अपने दिल की इच्छाओं, अपने प्यार और अपने डर से।