इंसान और इंसानियत के बीच की खाई

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इंसान और इंसानियत के बीच की खाई


कविता "इंसान और इंसानियत के बीच की खाई" समाज में बढ़ती दूरी, स्वार्थ और नैतिक पतन को दर्शाती है। यह उन मूल्यों की कमी को उजागर करती है, जो कभी इंसानियत का आधार थे—मदद, प्रेम, और करुणा। रिश्तों में स्वार्थ, धर्म में विभाजन और मानवीय संवेदनाओं की कमी ने इंसान और इंसानियत के बीच गहरी खाई पैदा कर दी है। अंत में, कविता उम्मीद जगाती है कि एकजुटता और प्रेम से यह खाई पाटी जा सकती है।

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