राधा ने ठान लिया कि वह दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएगी। उसने गाँव में महिलाओं को इकट्ठा किया और उन्हें दहेज के दुष्परिणामों के बारे में बताया। उसने महिलाओं को समझाया कि कैसे दहेज प्रथा महिलाओं को कमजोर बनाती है और उनके आत्मसम्मान को चोट पहुँचाती है।
राधा की इस पहल से गाँव की कुछ महिलाएँ प्रेरित हुईं। उन्होंने अपने बेटों की शादी में दहेज न लेने का वादा किया। लेकिन समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी इस प्रथा को सही मानता था।