वक़्त बदल रहा है
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वक़्त बदल रहा है
कविता
चाहते तो हैं की लौट चलें हम वापस रास्ता घर का हम अब ना ढूंढ पा रहे हैं, क्यों निकले चंद पैसों की तलब में घर से, बस यही सोच के अब हम पछता रहे हैं।
लेखक : Writer Dev
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