प्रकृति का प्रकोप -एक खत

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प्रकृति का प्रकोप -एक खत


"कभी-कभी, जीवन की सच्चाई आपके पैरों तले ज़मीन खींच लेती है।" आकाश, जो अपनी मां मंजरी के स्नेह और देखभाल में पला-बढ़ा, उनकी मृत्यु के बाद पूरी तरह टूट चुका है। लेकिन जब एक दिन उसे उनकी अलमारी में छुपा एक ख़त मिलता है, तो उसकी दुनिया हिल जाती है। यह ऐसी कहानी है जो सिखाती है कि सच्चा रिश्ता खून से नहीं, दिल से बनता है। "कभी-कभी, अतीत के प्रकोप से ही भविष्य की रोशनी निकलती है।"
: Writer Raj

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