"इंतजार " इसकी भी अपनी एक अलग कहानी है, जिस तरह हर कहानी को अपना आखिरी पन्ना नहीं मिलता उसी तरह कभी कभी किसी का इंतजार उम्र भर ख़त्म नहीं होता , कुछ ऐसा ही इंतजार लिखा है ध्वनि की मां श्रेष्ठा की क़िस्मत में. . . .
ये कहानी है ध्वनि की। जो उत्तराखंड के एक शहर रुद्रपुर से दिल्ली में अपने सपनों को पूरा करने आई है, लेकिन उसके इरादे सिर्फ अपने सपने ही नहीं , उसे अपनी मां श्रेष्ठा के सपने भी पूरे करने हैं। उनका सालों से चल रहा इंतजार ख़त्म करना चाहती हैं ध्वनि जिसके लिए आज भी उनकी निगाहें बिना कुछ कहे तरसती रहती हैं. . .
वो सपने, वो खुशियां ... जिन्हें ध्वनि की परवरिश और उसे खोने के डर से श्रेष्ठा काफ़ी पीछे छोड़ आई है।
क्या हुआ था जिससे श्रेष्ठा टूट गई थी? और क्या इस बार ध्वनि हालात बदल पाएगी? श्रेष्ठा अपनी बेटी को बीते कल से दूर रख पाएगी? जानने के लिए पढ़िए " हर लम्हा इंतज़ार का "
Her lamha intezaar ka