अभिमान
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अभिमान
कविता
मत करो अभिमान इस काया पर, इक दिन ये मिट्टी में मिल जानी है। गोरी हो या चाहे हो काली, लंबी हो या कि हो छोटी। मोटे हो या हो चाहे दुबले, सब की गति एक सी ही होनी है। मत करो अभिमान इस काया पर, इक दिन ये मिट्टी में मिल जानी है।
: निर्मेश
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