स्पर्श
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स्पर्श
कविता
स्पर्श कर देती है व्यक्त, दिल में सारे भाव को। दिल में है भारी नफरत, या भरा है उसके दिल में प्यार। है दिल में उसके श्रद्धा, या है घृणा के भाव। स्पर्श में है उसके आसक्ति, या है विरक्ति भाव।
: निर्मेश
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