"बिन फेरे हम तेरे" एक ऐसी कहानी है जो प्यार, संघर्ष, और सामाजिक रूढ़ियों से लड़ने की प्रेरणा देती है। मुंबई की इस कहानी में दिव्या और आर्यन, दो बिल्कुल अलग पृष्ठभूमि के लोग, प्यार में पड़ते हैं। दिव्या, एक साधारण और आत्मनिर्भर लड़की है, जबकि आर्यन एक अमीर लेकिन सच्चाई को तरसता हुआ युवक है।
उनका प्यार समाज और परिवार की सोच से टकराता है। आर्यन का परिवार उसकी प्रेमिका को उसके स्टेटस और पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से ठुकरा देता है, जबकि दिव्या का परिवार समाज के डर से उसका समर्थन नहीं करता। इन कठिनाइयों के बावजूद, दोनों अपने प्यार और विश्वास को बनाए रखते हैं और बिना किसी सामाजिक मान्यता या परंपरा के एक नई जिंदगी शुरू करते हैं।