स्पर्श
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स्पर्श
कविता
फूलो पर पड़ता ओस की बून्द सा बागो मे घूमता मोर सा नदी के मचलते छोर सा गाँव की पहली भोर सा स्पर्श है तुम्हारा कान्हा की बजती बांसुरी मीरा के गीत सा चिड़ियाँ की ची ची प्रेमिका की प्रीत सा स्पर्श है तुम्हारा
लेखक : Sagar
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