असंभव कुछ भी नहीं
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असंभव कुछ भी नहीं
कविता
उनकी बातों में आ कर, आने वाली उलझनों से घबरा कर। ना राह बदलना तुम, चलते रहना, कोशिश करते रहना। असंभव कुछ भी नहीं है, एक दिन बुलंदी पर पहुंच ही जाओगे।
: निर्मेश
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