ये कहानी है गगन और क्षिति की। जिनकी मुलाकात ही रिश्ता तय होने के बाद हुई। दोनो एकदूसरे से बिल्कुल अजनबी थे। पहली मुलाकात में इनकी पहचान हुई।
कुछ तो किस्मत से जुड़ा था जो दोनो ने मिलना मंजूर किया। शादी को बस इनकी रजामंदी ही बाकी थी। और वो भी इन्होंने कुबूल किया।
लेकिन कहां ये प्रेम किस्मत को रास आता है, जब तक ठोक बजा न ले , ऊपरवाला कहां बाज आता है।
तो जी बस इनकी भी कहानी में यही हुआ, महीने भर के भीतर ही दोनो जुदा हो गए।
एक एक्सीडेंट क्षिति का वजूद मिटा गया। और गगन ने खुद को उसका ही बना दिया। 5 साल बाद गगन को एक अजनबी लड़की , धरा, से वही एहसास मिला। क्या वो क्षिति है? या गगन की दूसरी मोहब्बत
क्या 5 साल से जो गगन ने क्षिति को खुद में बसाया था, धरा के आने से भुला देगा?
सब जानने के लिये पढ़े।
मेरी ये कहानी
तुम ही आना