सुबह का सपना
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सुबह का सपना
रोजाना प्रकाशित
मैंने उनकी पसन्द-भरी आँखों की ओर देखा, तो जैसे पानी को दिशा मिल जाती है, वैसे ही मेरी दृष्टि अनायास उधर घूम गई, जिधर वह देख रहा था। यह एक कलेण्डर था, जिसमें दो स्वस्थ बच्चे, रुई सा सफेद कबतूर पकड़े थे। मन आपसे-आप खिल उठा
: rani
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