अशम्भव कुछ भी नहीं
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अशम्भव कुछ भी नहीं
कविता
अब छोड़ तू निराशा की इस डोरी को, तोड़ दे तू उदासी की ज़ंजीरों को, दिखा तेरा जलवा अब पूरी दुनिया को, तेरे तेज की चमक दिखादे अब सबको ।
: rani
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