शब्दों के बिना भी आवाज़ गूंज सकती है, और खामोशी में भी क्रांति आ सकती है।
एक मूक लड़की, आस्था, जिसकी खामोशी उसकी ताकत है। अनाथाश्रम में पली-बढ़ी आस्था को अपनी जिंदगी में मुश्किलें विरासत में मिली थीं। लेकिन जब एक रात अनजान खतरे ने उसके आश्रम को घेर लिया, तब इस खामोश लड़की ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से ऐसा कदम उठाया जिसने न केवल उसके आश्रम, बल्कि पूरे गांव को बचा लिया।