ठंड भरी रात
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ठंड भरी रात
कविता
सड़कों पर रहते है भिखारी। पास उनके एक फटा कंबल, ठंड सताती है उनको रात भर। ठंड भरी रात लगती इनको भारी, जब आराम से सोए दुनिया सारी।
: निर्मेश
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