ठंडी भरी रात

client-img

ठंडी भरी रात


शीत हवाएँ डोल रही, हो रही कोहरे की बौछार, चारदीवारी नसीब नहीं झेल रहे ठंड की मार, जहाँ सो रहे थे वहाँ कुछ लकड़ियाँ सुलग रही थी, फटे हुए कंबल में दुबके जैसे हड्डियाँ हिल रही थी I

15

Views

5

Ratings

1 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप