लालच
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लालच
कविता
लालच बुरी बला होती है, बचपन से ये सुनते आए हैं। इसके चक्कर में पड़ कर लोगों ने, अपने संचित धन को भी गवाएं है। अब जब है सब कुछ ऑन लाइन तो, लालच का जाल भी वैसे ही फैलाया जाता है। भोले भले लोगों को उल्लू बना कर, जम कर चूना लगाया जाता है।
: निर्मेश
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